अध्याय 1. पहला नियम: बुरी आदतों को छोड़ना || FOR PARENTS ABOUT CHILDREN

जब मैं पेरेंटिंग (माता पीता) के ऊपर लिख रहा था, तब सबसे पहले माँ बनने के बारे में जो चीजें होती हैं, मैने उस पर रिसर्च की और फिर मुझे पता चला कि माँ बनने के बारे में सोचने से पहले शरीर पर बाहर के खाने पीने की चीजों से होने वाले दुष्प्रभाव से बचना चाहिए। मैंने सोचा की उसके बारे में लिखना चाहिए उनके तभी मैने हानि पहुचानी वाली आदतों से खुद को होने वाले नुकसान के बारे में सोचना शुरू किया। आज का यह लेख माँ बनने के बारे में सोचने से पहले सबसे ख़राब चीज, शराब के सेवन से महिलाओं के शरीर पर जो विनाशकारी प्रभाव पड़ता है, उसके बारे में है।


अध्याय 1. पहला नियम: बुरी आदतों को छोड़ना || FOR PARENTS ABOUT CHILDREN


अगर कोई भी व्यक्ति शराब का कई दिनों तक सेवन नहीं करता है और उसका पूरी तरह से परहेज करता है तो शराब के कारण अगर शरीर की कोशिकाओं में कोई क्षति होती है तो वह वापस पुनर्स्थापित (regenerate) होती है। लेकिन लड़कियों और महिलाओं में ऐसा देखने को नहीं मिलता। अगर किसी महिला के द्वारा या किसी लड़की के द्वारा एक बोतल बियर या एक कैन दारु का सेवन किया जाता है तो इससे क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ सकती है। और जिससे बच्चा जन्म से पहले ही बीमार पड़ सकता है। 

क्योंकि किसी भी लड़की के द्वारा सेवन की गयी एक बीयर की बोतल या  एक शराब की कैन बहुत सी कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकता है। 

विज्ञान के अनुसार पुरुषों में उच्च गुणवत्ता वाले शुक्राणु 72 दिनों में यानी तीन महीनों के अंदर अंदर नए बन जाते है। इसीलिए अगर कोई पुरुष या लड़का शराब का सेवन भी करता है और कुछ समय बाद उसका परहेज़ शुरू करता है तो समय के साथ उसका शरीर स्वयं को शुद्ध करने की कोशिश करता हैं और कोशिकाओं को पुनर्स्थापित करता हैं। लेकिन महिलाओं के मामले में स्थिती पूरी अलग है। महिलाएं प्रजनन अंगों के साथ ही पैदा होती है और उन्हें बदल नहीं सकती। जन्म से ही महिलाओं में अण्डे अण्डाशय में भरे हुए रहते हैं और एक निश्चित उम्र के बाद में माहवारी के रूप में या ओवुलेशन के रूप में वे एक एक कर के बाहर आने लगते हैं। लेकिन महिलाओं में इसकी एक निश्चित संख्या होती है। 

इनकी एक फिक्स संख्या होती है और उन्हें ना तो बदला जा सकता है, और ना ही उन्हें कम किया जा सकता है। लेकिन शराब के सेवन से वे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं जिसमे प्रजनन अंग और प्रणाली भी शामिल है।  और अगर कोशिकाये क्षतिग्रस्त हो जाती है या मर जाती है तो उन्हें ठीक नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि लड़कियों की कंडीशन युवाओं से बहुत ही अलग होती है। 

चाहे हमें किसी भी उम्र में होश आये, लेकिन क्षति पहले ही हो चुकी होती है। जीतनी जल्दी हम इस बारे में सोचेंगे और एक स्वास्थ्य और समझदारी भरा जीवनशैली अपनाना शुरू करेंगे, तो हमारे बच्चों को उतनी ही अच्छी इम्युनिटी मिलेगी और बच्चों का जीवन भी उतना ही बेहतर होगा। क्योंकि यह चीज़ (डीएनए) एक जेनरेशन से दूसरी जेनरेशन में बढ़ता है। 

प्राकृतिक मानव निर्माण की प्रक्रिया इतनी सूक्ष्म है कि एक चमत्कार ही माना जा सकता है। क्योंकि आज तक वैज्ञानिक भले ही कितने भी आगे बढ़ गए हों, लेकिन एक शरीर से दूसरे शरीर को बनाना अभी तक उन्होंने सीखा नहीं है। जबकि एक मनुष्य एक शरीर से दूसरा शरीर बनाता है, और वह ये सब कई सालों से करता आ रहा है। इसीलिए स्वचेतना का सबसे पहला और मुख्य रूप से प्रकट होने का मतलब है बुरी आदतों को त्यागना। 

हमारा बुरी आदतों का मतलब सिर्फ शराब से नहीं है बल्कि तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों से भी हैं। हालांकि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि नशीले पदार्थ, हमारे शरीर को बहुत बुरी तरह क्षति पहुंचाते हैं और यह घातक भी होते है। फिर भी हम आजकल की इस मॉडर्न मीडिया का और मॉडर्न ज़माने का अनुसरण करते हैं। जिसके अनुसार सुंदर जीवन का मतलब ही होता है कि हाथ में शराब का गिलास और सिगरेट का होना। लेकिन यह बहुत अच्छी बात है कि सभी महिलाएं ऐसा नहीं करतीं हैं और शराबी नहीं पीती है। लेकिन अब आजकल के इस बढ़ते हुए आधुनिक वातावरण में जितनी भी युवा लड़कियां हैं, उसमें से 80 से 90% लड़कियों ने शराब का या धूम्रपान का सेवन किया ही होगा। 

शराब की लत को बुरी आदत नहीं मना जा सकता क्योंकि यह तब तक बुरी आदत नहीं है जब तक आपका उस पर कोई कंट्रोल ही ना हों। यह बुरी आदत नहीं बल्कि एक मानसिक रूप की बीमारी है। हालांकि किसी भी प्रकार की शराब का नियमित सेवन एक ऐसी आदत है जिस पर चिंता नहीं की जाती है और धीरे धीरे यह कुछ शरीर को उस स्थिती तक ले जाती है जहाँ हर दम्पत्ति या कोई भी कपल, चाहे उनकी कितनी भी इच्छा हो कि उनका इतना अच्छा और स्वस्थ बच्चा जन्म ले, लेकिन वे संतान उत्पन्न करने की उस क्षमता तक नहीं पहुँच पाते है। 

इसीलिए अंत में इसका निष्कर्ष यहीं निकलता है कि गर्भधारण करने से पहले शरीर को सभी बूरी चीजों से दूर कर लो। कम से कम 1 साल पहले से ही शराब का और नशीले पदार्थों का सेवन बंद कर दो। अगर दो या तीन वर्ष से पहले अगर शराब का सेवन बंद कर दिया जाए तब तो बहुत ही अच्छा है। इस दौरान के परहेज के कारण सिर्फ शरीर में जितने भी नकारात्मक और अपशिष्ट चीजें होती है, शरीर उनको कम करता जाता है।

और साथ ही में यदि उचित पोषण लिया जाए, नियमित दिनचर्या, ऊर्जा और आद्यात्मिक अभ्यास को भी सही से किया जाए तो जीवन के प्रति सही दृष्टि कौण को प्राप्त किया जा सकता है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि न केवल गर्भवती महिला बल्कि उसके साथी को भी शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। 

इसके अलावा याद रखें कि एक छोटे बच्चे के लिए उसका परिवार ही उसकी दुनिया होती है। उसके माता पिता द्वारा की जा रही बाते, उसके बचपन में उसके आसपास चल रहे किसी भी तरह की चीज़ के थ्रू वह अपनी आदते बनाता है। और यही उसके व्यव्हार और संबंधों की नींव रखता है। माता पिता और करीबी रिश्तेदारों का व्यवहार और जीवनशैली बच्चे के मन में हर दिन गहरे एक सकारात्मक या नकारात्मक उदाहरण का रूप बनकर निकलता है कि आखिरकार जीवन की शुरुआत में बच्चा अच्छे और बुरे कर्मों में अंतर करने में असमर्थ होता है और धीरे धीरे उसे वह चीज़ समझ आने लगती है। बच्चा माता पिता से मिलने वाली हर बात को सही रखता है और वह इसे जीवन का आदर्श मान लेता है। अगर हम सभी अपने बच्चों के लिए सर्वोत्तम सवस्थ और खुशहाल जीवन का सपना देखे, तो क्या हमें सच में यही चाहेंगे कि वे इस तंबाकू वाले जहरीले धुओं की सांस लें या ऐसे मादक पदार्थ या शराब का सेवन करें जो उसकी मानसिकता को ही बदल दें? नहीं ना? 

किसी ने कहा था कि शराबी कई ऐसे काम करता है जिन्हें करने के बाद  होश आने पर उसको खुद को शर्म आती है और उसे बुरा भी लगता है। मगर तब तक वह गलत काम कर चूका होता है। इसीलिए अपने आप को और अपने बच्चों को इस जाल में किसी भी तरीके से नहीं फंसने देना है। तो अगर आपने अपनी बुरे आदतें छोड़ दी है और तो कुछ ही वर्षों में आपका शरीर सवस्थ बन जाएगा। और इसी एक अच्छी शुरुआत के साथ आप एक सवस्थ जीवनशैली की शुरुआत कर सकते हैं। 

कुछ वर्षों में यह बहुत हद तक आपके शरीर को शुद्ध कर देगी। स्वयं के प्रति और अपने आसपास की दुनिया में प्रति अच्छी भाव रखना है और अच्छा दृष्टिकोण रखना है। ऐसे कौन से साधन मौजूद हैं, जिससे उन ऊर्जा को पुन प्राप्त किया जा सकता है, ऐसे साधनों का उपयोग करना है। जैसे अपने आने वाले बच्चे को एक सवस्थ शरीर भी प्राप्त हो और एक अच्छा माहौल भी प्राप्त हो। धन्यवाद।

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